देहरादून: उत्तराखंड में डाक विभाग अब युवाओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए एक नई और आधुनिक पहल की शुरुआत करने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के भीतर ‘जेन-जी डाकघर’ स्थापित किए जाएंगे। यह विशेष डाकघर नई पीढ़ी की जरूरतों और सुविधा को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड में डाक विभाग की इस पहल में पारंपरिक डाकघर को युवाओं की पसंद और जीवनशैली के अनुरूप अपग्रेड किया जाएगा। जेन-जी डाकघरों में हाई-स्पीड वाई-फाई कनेक्टिविटी, युवाओं की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार कॉफी शॉप जैसी व्यवस्था, आधुनिक इंटीरियर और डिजिटल सुविधा केंद्र और डाक सेवाओं के बारे में जानकारी देने के लिए इंटरैक्टिव डिस्प्ले जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। यह मॉडल विशेष रूप से कॉलेज परिसरों में लागू किया जाएगा। कॉलेज कैंपस में ऐसे डाकघर स्थापित होने से युवाओं और डाक सेवाओं के बीच की दूरी कम होगी और डिजिटल एवं पारंपरिक दोनों तरह की सेवाओं का उपयोग बढ़ेगा।
युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर
डाक विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि डाकघर सीधे छात्रों तक पहुंचेगा, तो वे डाक विभाग की योजनाओं, सेवाओं और डिजिटल पहलों को अधिक प्रभावी तरीके से समझ पाएंगे। इसके साथ ही, जेन-जी डाकघरों में युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे छात्र न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली जान सकेंगे, बल्कि प्रशासनिक और प्रबंधन कौशल भी विकसित कर सकेंगे। जेन-जी डाकघर का विचार नया जरूर है, लेकिन इसकी शुरुआत पहले ही दिल्ली में हो चुकी है और वहां यह मॉडल सफल रहा है। अब उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होने जा रहा है जहां यह नवाचार लागू किया जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगा ये मॉडल
डाक विभाग इस आधुनिक डाकघर मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। जिसके पहले चरण में पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल जिलों के शैक्षणिक संस्थानों में जेन-जी फ्रेंडली डाकघर खोले जाएंगे। दूसरे चरण में प्रदेश के देहरादून सहित अन्य जिलों में इनका विस्तार किया जाएगा। मुख्य डाकघर के निदेशक अनुसुया प्रसाद चमोला के ने बताया हमारा उद्देश्य डाकघर को युवाओं के पास लेकर जाना है। कॉलेज परिसरों में जेन-जी डाकघर खोलने से हम युवाओं को बेहतर तरीके से डाक सेवाओं से जोड़ पाएंगे।”
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