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पिथौरागढ़ के 10 गांवों ने उठाया आंदोलन का बिगुल, बागेश्वर में शामिल करने की मांग

पिथौरागढ़: पिथौरागढ़-बागेश्वर सीमा पर स्थित बनकोट क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों को बागेश्वर जिले में शामिल करने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। लंबे समय से यह मांग उठ रही है और ग्रामीण अब 15 फरवरी से क्रमिक अनशन शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इस संबंध में संघर्ष समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

संघर्ष समिति की बैठक पूर्व सूबेदार मेजर शिवराज सिंह बनकोटी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि हर ग्राम सभा से पांच-पांच लोग क्रमिक अनशन में भाग लेंगे। अनशन का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक रखा गया है और स्थान के रूप में पंचायत घर बनकोट चुना गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जबकि बागेश्वर जिला मुख्यालय केवल 30 किलोमीटर दूर है, फिर भी उन्हें अपने हर जरूरी काम के लिए 170 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ तक जाना पड़ता है। यही कारण है कि ग्रामीण अपनी मांग को मजबूती देने के लिए अनशन जैसे आंदोलन का सहारा लेना चाहते हैं।

बता दें कि वर्ष 1997 में बागेश्वर जनपद के गठन के बाद से ही सीमावर्ती इन 10 ग्राम पंचायतों—बनकोट, पलतोड़ी, जमतोला, भट्टीगांव, सिरसोली, बटगरी, काकड़पानी, धारी, रूगडी और बासीखेत—को बागेश्वर में शामिल करने की मांग लगातार उठाई जा रही है। पिछले साल ग्रामीणों ने इस मांग को लेकर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था। कई आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों में रोष बढ़ गया है।

भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि

ग्रामीणों का कहना है कि उनका अधिकांश आवागमन बागेश्वर से ही होता है। पूर्व में ट्रेजरी भी बागेश्वर में ही थी। इसके साथ ही विवाह, मेल-मिलाप और अन्य सामाजिक गतिविधियां भी बागेश्वर के निकटवर्ती गांवों में ही होती हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से देखा जाए तो यह क्षेत्र बागेश्वर जिले में शामिल होना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले अल्मोड़ा जिले की 14 ग्राम पंचायतों को बागेश्वर जिले में शामिल किया गया था क्योंकि वे बागेश्वर के निकटवर्ती थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने दिया आश्वासन

पिछले वर्ष बागेश्वर के कांडा महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी बनकोट क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों को बागेश्वर में शामिल करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, इसके बाद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई है।
संघर्ष समिति ने बैठक में तय किया कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो अनशन और अन्य आंदोलन तेज किए जाएंगे। वर्तमान में लगभग 6 हजार लोग इन 10 ग्राम पंचायतों से जुड़े हैं और वे बागेश्वर जिले में शामिल होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को उनकी परेशानी समझनी चाहिए और जल्द ही इस मामले में ठोस निर्णय लेना चाहिए।

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