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उत्तराखंड में बिजनेस के लिए वृक्षों पर चली आरी, 41 हजार पेड़ काट डाले

हल्द्वानी: कुमाऊं के प्रवेश द्वार Haldwani के Belbaba Area में वन निगम ने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की है। जानकारी के अनुसार, लगभग 50 साल पुराने 41 हजार सागौन और खैर के पेड़ों को काट दिया गया।

एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार तराई केंद्रीय वन प्रभाग की भांखड़ा रेंज के अंतर्गत करीब 121 हेक्टेयर क्षेत्र में ये पेड़ लगे हुए थे। अब इस इलाके में उजाड़ जैसी स्थिति दिखाई दे रही है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। वन विभाग के अनुसार, यह कटाई कमर्शियल प्लांटेशन के तहत की गई, जिससे करीब 73.10 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया केंद्र सरकार के स्वीकृत वर्किंग प्लान के तहत हुई।

जलवायु परिवर्तन के बीच बढ़ी चिंता

आज जब Climate Change का असर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है—जैसे ग्लेशियर पिघलना, असमय बारिश और बढ़ती गर्मी—ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई ने पर्यावरणविदों को चिंतित कर दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञ Ajay Rawat के अनुसार बड़े पैमाने पर पेड़ कटने से तापमान बढ़ता है, वर्षा का पैटर्न बदल जाता है, भूजल रिचार्ज प्रभावित होता है, साथ ही वन्यजीवों और पक्षियों के आवास नष्ट होते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ सकता है।

पेड़ों की कटाई से न केवल पर्यावरण बल्कि जानवरों और पक्षियों का जीवन भी प्रभावित होता है। पहले जहां प्राकृतिक जल स्रोत पर्याप्त होते थे, अब जानवरों के लिए कृत्रिम जल स्रोत बनाने पड़ रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर “विकास बनाम पर्यावरण” की बहस को तेज कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक लाभ के लिए प्रकृति से समझौता भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

वर्किंग प्लान के तहत की गई कटाई

डीएफओ U C Tiwari के अनुसार, यह कटाई वर्किंग प्लान के तहत की गई और यह क्षेत्र प्राकृतिक जंगल का हिस्सा नहीं बल्कि प्लांटेशन एरिया था। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी मानसून में यहां फिर से पौधारोपण किया जाएगा।

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