देहरादून: उत्तराखंड में भूमि और अन्य अचल संपत्तियों की रजिस्ट्री कराना अब पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है। उत्तराखंड में पिछले महीने ही सर्किल रेट में वृद्धि की थी, अब रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी की गई यह बढ़ोतरी खरीदारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार लेकर आई है।
जानकारी के अनुसार बीते सोमवार को सोमवार से सरकार ने रजिस्ट्रेशन शुल्क की अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी है। लगभग 10 वर्ष बाद शुल्क में की गई यह बढ़ोतरी राज्य में विभिन्न रजिस्ट्री कार्यालयों के बुनियादी ढांचे में सुधार और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से लागू की गई है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सोमवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वर्ष 2015 में रजिस्ट्रेशन शुल्क की अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये निर्धारित की गई थी। लगभग 10 वर्ष बाद शुल्क में वृद्धि को सरकार ने जरूरी बताया है।
खरीदारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार
उत्तराखंड सरकार ने पिछले महीने में ही प्रदेश में सर्किल रेट में वृद्धि की थी, जिससे भूमि और परिसंपत्तियों की खरीद पर कुल लागत पहले ही बढ़ चुकी है। अब रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी की गई यह बढ़ोतरी खरीदारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार लेकर आई है। नए शुल्क लागू होने के बाद किसी भी भूमि या परिसंपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर अब खरीदारों को अधिक राशि खर्च करनी होगी।
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग का प्रस्ताव
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया था कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की तर्ज पर रजिस्ट्रेशन शुल्क को संपत्ति मूल्य के एक प्रतिशत के बराबर किया जाए। लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। यदि यह प्रस्ताव लागू होता, तो करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियों पर रजिस्ट्री कराने वालों को भारी राशि चुकानी पड़ती। उत्तराखंड सरकार ने स्थिति को देखते हुए शुल्क को प्रतिशत में लागू करने के बजाय केवल अधिकतम सीमा बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि महंगी से महंगी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर भी रजिस्ट्री शुल्क 50 हजार रुपये से अधिक नहीं लिया जाएगा। सरकार के अनुसार इससे आम खरीदारों पर अत्यधिक बोझ नहीं बढ़ेगा, जबकि विभागीय सुधारों के लिए आवश्यक राजस्व भी प्राप्त होगा।
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