रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार एक बड़ा फैसला लिया गया है। अब यात्रा मार्गों पर मांस की दुकानें नहीं दिखाई देंगी, जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। पहले कई श्रद्धालु इसको लेकर शिकायत करते थे, जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि गुप्तकाशी से गौरीकुंड तक यात्रा मार्ग पर मांस की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके लिए संबंधित दुकानों के बाहर नोटिस भी लगाए जा रहे हैं और व्यापारियों को पहले से ही सूचित किया जा चुका है कि यात्रा शुरू होने से एक सप्ताह पहले सभी मांस की दुकानें बंद कर दी जाएं।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यदि कोई व्यापारी मांस बेचता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सामाजिक स्तर पर भी सख्ती बरतने की बात कही गई है। इस फैसले के पीछे स्थानीय महिला मंगल दलों का अहम योगदान रहा है। शेरसी, रामपुर, सीतापुर, बड़ासू, गौरीकुंड समेत कई क्षेत्रों की महिलाओं ने मांस और शराब की दुकानों के खिलाफ आंदोलन किया था। उनके इस प्रयास से प्रशासन ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई और कार्रवाई की। प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा गुप्तकाशी, नारायणकोटी, मैखंडा, फाटा, सीतापुर और सोनप्रयाग जैसे क्षेत्रों में मांस की दुकानों पर नोटिस चिपकाए गए हैं। अन्य स्थानों पर भी यह कार्रवाई जारी है। उनका कहना है कि इस तरह की दुकानों को देखकर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के पास केदार घाटी को लेकर गलत संदेश जाता है, इसलिए इन पर प्रतिबंध जरूरी था।
प्रशासन की निगरानी जारी
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो। इस निर्णय से केदारनाथ यात्रा मार्ग पर धार्मिक और पवित्र वातावरण बना रहेगा। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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