Breaking News

उत्तराखंड हाईकोर्ट का बहुत बड़ा फैसला, डॉक्टरों को पहाड़ में करनी ही होगी 3 साल नौकरी

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बांडधारी डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों को कुल मिलाकर केवल तीन वर्ष की अनिवार्य सेवा ही देनी होगी और इससे अधिक सेवा के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि किसी डॉक्टर ने एमबीबीएस पूरा करने के बाद और पीजी में प्रवेश लेने से पहले दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दी है, तो उस अवधि को पीजी के बाद की अनिवार्य सेवा में जोड़ा जाएगा। इससे उन डॉक्टरों को राहत मिलेगी, जिन्होंने पहले ही कठिन परिस्थितियों में सेवाएं दी हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास बॉन्ड की राशि वसूलने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। यदि कोई डॉक्टर पीजी के बाद निर्धारित सेवा शर्तों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला राज्य सरकार की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया गया।

जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की व्यवस्था

राज्य के जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाकर मरीजों का इलाज और सर्जरी कराई जाएगी, जिससे मरीजों को रेफर करने की समस्या कम होगी। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसके तहत निजी डॉक्टरों से अनुबंध कर उन्हें विजिट और सर्जरी के आधार पर भुगतान किया जाएगा। इससे न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, गायनी, नेफ्रोलॉजी समेत कई विभागों में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती

सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए मैदानी क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों को छह माह के लिए वहां भेजने की योजना बनाई है। इसके लिए डॉक्टरों से स्वेच्छा के आधार पर विकल्प मांगे जा रहे हैं।

अस्पतालों के बीच समन्वय बढ़ाने की योजना

दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल के बीच भी समन्वय बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत विशेषज्ञ डॉक्टर जरूरत के अनुसार दूसरे अस्पतालों में जाकर सेवाएं देंगे, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

“यू कोट वी पे” योजना का विस्तार

सरकार द्वारा पहले से चलाई जा रही “यू कोट वी पे” योजना के तहत भी डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है। इस योजना में डॉक्टर अपनी अपेक्षित सैलरी बताते हैं और उसी आधार पर उन्हें नियुक्त किया जाता है, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके।
हाईकोर्ट के इस फैसले और सरकार की नई योजनाओं से उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। इससे डॉक्टरों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सकेगा।

Check Also

उत्तराखंड में बड़ी वारदात, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में लाखों की लूटपाट; सिर पर तमंचा रखा और..

रुद्रपुर: उत्तराखंड के रुद्रपुर से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां संपर्क क्रांति ट्रेन …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *