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सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों और पर्यटन उत्पादों को समग्र रूप से देता है बढ़ावा

केंद्र सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक एवं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों की मदद कर रही है। इसी क्रम में उत्तराखंड में भी ट्रैवल मेलों एवं प्रदर्शनियों में भागीदारी; रोड शो, इंडिया इवनिंग्स, सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन के माध्यम से सहयोग किया जा रहा है। एमएसपी खरीद को लेकर केंद्र द्वारा जानकारी दी गई कि विगत 12 वर्षों में अब तक लगभग 13 हजार एमएमटी की खरीद पर 13 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई है।

संसद के पटल पर राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र भट्ट ने धार्मिक, सांस्कृतिक एवं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की योजनाओं के संबंध में सवाल पूछे। जिसका जवाब देते हुए पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों और पर्यटन उत्पादों को समग्र रूप से बढ़ावा देता है। ताकि पर्यटन सृजन करने वाले बाज़ारों में भारत को एक पसंदीदा पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सके तथा वैश्विक पर्यटन बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके। प्रचार गतिविधियों में ट्रैवल मेलों एवं प्रदर्शनियों में भागीदारी; रोड शो, इंडिया इवनिंग्स, सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन; भारतीय व्यंजनों एवं सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन और उन्हें प्रोत्साहित करना; टूर ऑपरेटरों को ब्रोशर उपलब्ध कराना, वैश्विक मीडिया अभियान चलाना तथा एयरलाइनों, टूर ऑपरेटरों और अन्य संगठनों के साथ संयुक्त विज्ञापन, संयुक्त प्रचार आदि शामिल हैं। योजना के अंतर्गत मेलों, महोत्सवों तथा पर्यटन-संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए राज्य सरकारों और संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों को केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह योजना राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों को विशिष्ट पर्यटन अनुभवों को बढ़ावा देने तथा धार्मिक, सांस्कृतिक, साहसिक पर्यटन आदि सहित विभिन्न पर्यटन उत्पादों को सुदृढ़ करने में सहायता करती है। साथ ही, यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करने और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देती है। पिछले तीन वर्षों में प्रोत्साहित किए गए आयोजनों उत्तराखंड को 2023-24 में 25 लाख एवं 2025-26 में 50 लाख की मदद की गई है।

इसी तरह एमएसपी पर उपज बेचने में आने वाली समस्याओं को लेकर पूछे सवालों का जवाब देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि सरकार 22 अधिदेशित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी निर्धारित करती है। जिसमें वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना के स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया था। तदनुसार, सरकार ने वर्ष 2018-19 से सभी अनिवार्य खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए एमएसपी में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50 प्रतिशत की वृद्धि की थी। इन उत्पादों का बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे गिर जाने पर कुल उत्पादन में से, केवल विपणन योग्य अधिशेष ही सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध होता है। इसमें केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा राज्य एजेंसियों के माध्यम से अधिसूचित दलहन में अरहर, मूंग, उड़द, मसूर और चना, तिलहन जिसमें मूंगफली छिलके सहित, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, रामतिल, सरसों/रेपसीड, कुसुम और कोपरा की खरीद एमएसपी पर की जाती है। इसी तरह एमआईएस के तहत, एमएसपी के अंतर्गत न आने वाली नाशवान कृषि और बागवानी वस्तुओं के लिए, राज्य, संघ राज्य क्षेत्र सरकारों के अनुरोध पर, बाजार मूल्यों में 10% या उससे अधिक की गिरावट की स्थिति में समर्थन प्रदान किया जाता है। जिसमें केंद्र और राज्य के बीच हानि का बंटवारा 50:50, पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में 25:75 होता है। राज्य सरकार केंद्रीय नोडल एजेंसियो के परामर्श से पर्याप्त संख्या में खरीद केंद्र खोलती है ताकि किसानों को एमएसपी पर अपनी उपज बेचने में सुविधा हो। राज्य राज्य सरकारें, केंद्रीय एजेंसियों के परामर्श से गोदामों/वैज्ञानिक भंडारण सुविधा की व्यवस्था, बोरी की व्यवस्था, परिवहन, वजन मशीन, नमी/बाह्य पदार्थ, तेल की मात्रा की जांच करने वाली मशीनों आदि सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करती हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय नोडल एजेंसियों को भी अपने खरीद केंद्रों के माध्यम से पूर्व-पंजीकृत किसानों से सीधे अरहर, मसूर, उड़द और चना सहित अधिसूचित दलहन की खरीद करने की अनुमति दी गई है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकार की एजेंसियों के माध्यम से केंद्रीय पूल के लिए गेहूं और धान की खरीद करता है। उत्पादन, विपणन योग्य अधिशेष, लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता और किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संबंधित राज्य सरकारें खरीद केंद्र खोलती हैं। किसानों की सुविधा के लिए मौजूदा मंडियों और डिपो, गोदामों के अतिरिक्त अस्थायी खरीद केंद्र भी स्थापित किए जाते हैं।

विकेंद्रीकृत खरीद योजना के तहत, डीएफपीडी राज्य सरकारों को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरण के लिए एमएसपी पर किसानों से मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, मक्का एवं रागी की खरीद करने की अनुमति देता है। कपास और कच्चे जूट की खरीद एमएसपी पर कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा की जाती है। एमएसपी बढ़ने से देश के किसानों को लाभ हुआ है, जो खरीद और किसानों को भुगतान की गई एमएसपी राशि के आंकड़ों से स्पष्ट होता है। वर्ष 2014 से जून 2026 तक कुल 12819 एमएमटी की खरीद ने कुल 27.80 लाख करोड़ की सब्सिडी केंद्र अब तक दे चुकी है।

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